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लड़का नहीं होने तक बच्चे पैदा करते हैं भारतीय, सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा

लड़का नहीं होने तक बच्चे पैदा करते हैं भारतीय, सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा

वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण की जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें आर्थिक स्थिरता को लेकर दिए गए सुझावों के अलावा एक चौंकाने वाला आंकड़ा भी सामने आया है.

वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण की जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें आर्थिक स्थिरता को लेकर दिए गए सुझावों के अलावा एक चौंकाने वाला आंकड़ा भी सामने आया है. यह आंकड़ा भारतीय समाज में बेटा पैदा करने की इच्छा को दर्शाता है. सर्वे में सामने आया है कि कई मां-बाप ऐसे हैं जो तब तक संतान पैदा करते हैं जब तक बेटा नहीं होता. यही नहीं, इसके अलावा लड़कों की गिनती के आधार पर भी संतान पैदा करते हैं. इस मामले में सर्वे में जिन राज्यों का जिक्र किया गया है, उनमें कोई राज्य पिछड़ा नहीं हैं बल्कि ‘पर कैपिटा इनकम’ के मामले में काफी आगे हैं. कुल मिलकर पूरे भारत की तस्वीर को इस रिपोर्ट में बयां किया है. इकोनॉमिक सर्वे में पेश डाटा भारतीय और चीनी की इसी सोच की गवाही देता है.

पुत्र मोह में 2 करोड़ से ज्यादा लड़कियां पैदा हुई
सर्वे में बताया गया है कि देश में करीब 2.1 करोड़ अवांछित लड़कियां हैं, यानी कि पुत्र मोह में इन्हें पैदा किया गया. सर्वेक्षण में लैंगिक असमानता को खत्म करने और महिलाओं के विकास की बात कही गई. इसमें कहा गया है कि जिस तरह की प्रगति भारत ने कारोबार सुगमता की रैंकिंग में की है, वैसी ही प्रतिबद्धता उसे स्त्री-पुरुष समानता के स्तर पर दिखानी चाहिए.

पंजाब-हरियाणा की हालत सबसे खराब
इकोनॉमि‍क सर्वे के मुताबिक, लड़के पैदा करने के लिए ट्राई करने के मामले या लिंग अनुपात के मामले में पंजाब और हरियाणा की स्थिति सबसे खस्ता है. यहां लिंग अनुपात 1000 लड़कि‍यों पर 1200 लड़के के आसपास है. गर्भपात और लड़का होने पर संतान बंद कर देने की वजह इन राज्यों में लिंग अनुपात में इतना बड़ा फर्क है. यहां लगभग हर मां-बाप लड़के के लिए ट्राई करता है.

लिंग अनुपात में मेघालय है बेस्ट
लिंग अनुपात के मामले में सबसे बेहतर रिकॉर्ड मेघालय का है. जहां जन्म के समय लिंग अनुपात और आखिरी संतान के वक्त लिंग अनुपात दोनों बिल्कुल एक समान स्थिति में हैं. इसके अलावा असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भी स्थिति ठीक है. हालांकि इन राज्यों में भी लड़के पैदा करने को लेकर चाहत रहती है.

लड़की के बजाए लड़कों को प्राथमिकता
इकोनॉमिक सर्वे में पेश आंकड़ों को समझें तो ज्यादातर राज्यों में लड़की के बजाए लड़के की चाहत रखते हैं. इन राज्यों की स्थिति इनकम के मामले में ठीक है, लेकिन फिर भी लिंग अनुपात के मामले में स्थिति कुछ ऐसी ही है. हालांकि, लड़का होने पर आगे संतान की चाहत नहीं रहती.

इकोनॉमिक सर्वे में चीन भी शामिल
सर्वे में भारत और चीन के 1970 और 2014 के आंकड़े दि‍खाए गए हैं. इसके मुताबि‍क, जन्‍म पर लिंग अनुपात 1 लड़की पर 1.05 लड़का है. चीन में 1970 में जन्म पर लिंग अनुपात 1.070 था. वहीं, 2014 में यह 1.156 हो गया. भारत के हालात भी कुछ ऐसे ही हैं. 1970 में जन्म लिंग अनुपात 1.060 था जो 2014 में बढ़कर 1.108 हो गया.

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