43 करोड़ की लागत से बना मथुरा रिफाइनरी का ऑक्टोमैक्स यूनिट

43 करोड़ की लागत से बना मथुरा रिफाइनरी का ऑक्टोमैक्स यूनिट

यह यूनिट ‘मेक इन इण्डिया’ का सफल उदाहरण है जो पूरी तरह से आईओसी की शोध एवं विकास इकाई द्वारा विकसित की गई है.

सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय तेल निगम (आईओसी) के मथुरा स्थित तेलशोधक कारखाने में देश की पहली ऑक्टोमैक्स यूनिट बनकर तैयार हो गई है जिसे जल्द ही चालू किया जायेगा. करीब 43 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस यूनिट के चालू होने से पेट्रोलियम उत्पादों की गुणवत्ता में काफी सुधार आयेगा और प्रदूषण पर लगाम लगेगी. मथुरा रिफाइनरी के कार्यपालक निदेशक लैरी राइट खोंगवीर ने शुक्रवार (19 जनवरी) को रिफाइनरी के 37वें स्थापना दिवस पर आफीसर्स क्लब में आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों, कर्मचारियों तथा उनके परिजनों को संबोधित करते हुये यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया, ‘55 किलो टन प्रतिवर्ष की क्षमता वाली ऑक्टोमैक्स इकाई का शिलान्यास पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मार्च 2016 में किया था. जो अब बनकर तैयार है. इस पर करीब 43 करोड़ की लागत आई है.’ इस अवसर पर उन्होंने सभी को बधाई देते हुए कहा, ‘वर्ष 2017 में मथुरा रिफाइनरी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है. वर्ष के दौरान हमने कई चुनौतियां पार की हैं. जिनमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए तय समय से दो वर्ष पूर्व ही भारत मानक छह (बीएस-6) ईंधन का उत्पादन शुरू करने एवं देश की पहली ऑक्टोमैक्स यूनिट की स्थापना प्रमुख हैं.’

ऑक्टोमैक्स यूनिट से पेट्रोलियम पदार्थों की गुणवत्ता में काफी सुधार आयेगा और प्रदूषण के लिहाज से भी यह बेहतर साबित होगी. खोंगवीर ने कहा, ‘पेट्रोलियम पदार्थों के शोधन के लिए दुनिया में अभी तक अमेरिका तथा यूरोप के विकसित देशों में ही यह तकनीक काम में लाई जाती है. यह यूनिट ‘मेक इन इण्डिया’ का सफल उदाहरण है जो पूरी तरह से आईओसी की शोध एवं विकास इकाई द्वारा विकसित की गई है.’ इसके बाद कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन) राजीव कलीता ने क्रमशः सभी को अंग्रेजी व हिन्दी में निष्ठा, लगन एवं परिश्रम से सेवा करने की शपथ दिलाई. इससे पूर्व प्रातः प्रभात फेरी निकाली गई एवं सायंकाल बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए.

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