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भारत 2018 में चीन को पीछे छोड़ फिर बनेगी सबसे तेज वृद्धि दर वाली बड़ी अर्थव्यवस्था

भारत 2018 में चीन को पीछे छोड़ फिर बनेगी सबसे तेज वृद्धि दर वाली बड़ी अर्थव्यवस्था

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘भारत 2018 में चीन को पीछे छोड़ सबसे तेजी से वृद्धि करती बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.”

21 जनवरी (भाषा) भारत 2018 में सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर चीन को फिर से पीछे छोड़ देगा. एक रिपोर्ट में यह बात कही गयी है. सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, जब शेष विश्व कम वृद्धि दर तथा अपर्याप्त ढांचागत बदलाव से गुजर रहा था, भारत दीर्घकालीन वृद्धि के साथ सुधार वाली अर्थव्यवस्था के तौर पर देखा गया. रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘भारत 2018 में चीन को पीछे छोड़ सबसे तेजी से वृद्धि करती बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. भारत का शेयर बाजार भी पांचवां सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा.’’ रिपोर्ट के अनुसार, जब विकसित अर्थव्यवस्थाएं दो से तीन प्रतिशत की दर से वृद्धि कर रही थी, भारत 7.5 प्रतिशत की दर को पार करने की राह पर था. अब भारत को अन्य उभरते बाजारों की परिस्थिति के कारण भी फायदा मिल रहा है. चीन की वृद्धि दर में कमी का रुझान है. रिपोर्ट में सावधान किया गया कि यदि मुद्रास्फीति बढ़ी तो बाजार प्रभावित होगा.

आजादी के बाद से 70वें साल में भारत में सबसे बड़ा आर्थिक सुधार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया गया है, जिसने देश की संघीय प्रणाली में एकीकृत बाजार को पैदा किया है. इसे लागू करने में हालांकि व्यापार और उद्योग को कई कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा. इस महीने की शुरुआत में उद्योग मंडल फिक्की की 90वीं आम बैठक में कॉर्पोरेट नेतृत्व मंडल द्वारा यह पूछे जाने पर कि कर संग्रहण में कमी पर जीएसटी का क्या असर है? वित्तमंत्री अरुण जेटली ने उन्हीं पर इसकी जिम्मेदारी डाल दी. जेटली ने कहा, “आप उद्योग से हैं. आपने ही लंबे समय से जीएसटी लाने की मांग की थी, इतने बड़े पैमाने पर सुधार को लागू करने से प्रारंभिक समस्याएं आती ही हैं, तो अब आप उस प्रणाली में जाना चाहते हैं, जो 70 साल पुरानी है.”

इससे पहले की प्रणाली में केंद्र और राज्य द्वारा वसूले जाने वाले करों की संख्या काफी अधिक थी, जिससे माल की आवाजाही में काफी देर लगती थी, क्योंकि उन्हें कई बार अलग-अलग करों को चुकाना होता था. अब राज्य स्तरीय करों को अखिल भारतीय जीएसटी से बदल दिया गया है, जिसमें राज्यों के सेस और सरचार्ज, लक्जरी टैक्स, राज्य वैट, खरीद शुल्क, केंद्रीय बिक्री कर, विज्ञापनों पर कर, मनोरंजन कर, प्रवेश शुल्क के विभिन्न संस्करण और लॉटरी व सट्टेबाजी पर कर शामिल है.

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