आर्थिक सर्वे, 2017-18 में भारत का GDP 166.28 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है

आर्थिक सर्वे, 2017-18 में भारत का GDP 166.28 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है

भारत में राजकोषीय घाटा यानी Fiscal Deficit लगातार कम हो रहा है. 2016-17 में Fiscal Deficit GDP का 3.5 प्रतिशत था और अगले वित्त वर्ष में Fiscal Deficit 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

भारत की राजनीति में आजकल भारत की अर्थव्यवस्था Trend कर रही है. अर्थव्यवस्था से जुड़े हर आंकड़े पर आजकल विपक्ष, Experts और जनता की पैनी नज़र है. आज राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ संसद के बजट सत्र की शुरुआत हो गई है और वार्षिक परंपरा के तहत इस अभिभाषण के बाद सरकार ने 2017-18 का आर्थिक सर्वेक्षण देश के सामने पेश किया है. सरल शब्दों में कहें तो आर्थिक सर्वे देश की आर्थिक सेहत का मूल्यांकन होता है. इसमें आंकड़ों के ज़रिए अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा बताई जाती है. इसमें बीते हुए वर्षों के आंकड़े होते हैं, भविष्य के अनुमान लगाए जाते हैं और सरकार के लक्ष्य का वर्णन होता है. सरकार 1 फरवरी को बजट पेश करेगी.

ये सरकार के मौजूदा कार्यकाल का आखिरी पूर्णकालिक बजट होगा. इसलिए ये आर्थिक सर्वेक्षण देश की अर्थव्यवस्था और देश की राजनीति के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. और आज हम इसका संपूर्ण विश्लेषण करेंगे. सबसे पहले बात करेंगे GDP की. 2016-17 में भारत का GDP 151.84 लाख करोड़ रुपये था, जबकि 2017-18 में भारत का GDP 166.28 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है.

अगर GDP Growth Rate की बात करें तो

2016-17 में भारत का GDP 7.1 प्रतिशत की विकास दर से बढ़ रहा था. भारत सरकार का अनुमान है कि 2017-18 में भारत का GDP… 6.75 प्रतिशत की विकास दर से बढ़ेगा. इस अनुमान के हिसाब से GDP Growth Rate में 0.35 प्रतिशत की कमी आ सकती है. हम ये कह सकते हैं कि नोटबंदी और GST लागू होने का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा है लेकिन ये असर बहुत मामूली है. सरकार का ये भी अनुमान है कि वर्ष 2019 में भारत की अर्थव्यवस्था 7 से 7.5 प्रतिशत की विकास दर से बढ़ेगी. ये भी संभव है कि तब भारत… दुनिया में सबसे तेज़ी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बन जाए.

कृषि और माइनिंग सेक्टर की विकास दर ..
2013-14 में 4.80 % थी.
2015-16 में 2.20 %
और 2016-17 में 4.40 % रही.

व्यापार, होटल, परिवहन और संचार के क्षेत्र की विकास दर..
2013-14 में 6.50 % थी.
2015-16 में 10.50 %
और 2016-17 में 7.80 % रही.

Manufacturing, construction, बिजली, गैस और पानी की आपूर्ति के क्षेत्र में विकास दर..
2013-14 में 4.20% थी,
2015-16 में 8.60% हुई
और 2016-17 में 6 % रही.

Financing, बीमा, रियल एस्टेट और व्यापार सेवाओं में विकास दर..
2013-14 में 11.20 % थी,
2015-16 में 10.80 %
और 2016-17 में 5.70 % रही.

अगर हम विशेष तौर पर कृषि की बात करें
तो 2015-16 में अनाज का उत्पादन 2 हजार 515 करोड़ टन था
और 2016-17 में अनाज का उत्पादन 2 हजार 755 करोड़ टन रहा.

अगर हम देश में बिजली के उत्पादन की बात करें तो 2015-16 में 1,336 अरब Kilowatt hour बिजली का उत्पादन हुआ था और वर्ष 2016-17 में 1,433 अरब Kilowatt hour बिजली का उत्पादन हुआ.

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में महंगाई दर नियंत्रण में है.
2015-16 में उपभोक्ता महंगाई दर 4.9 प्रतिशत थी.
2016-17 में उपभोक्ता महंगाई दर 4.5 % हुई और 2017-18 में इसके 3.3 % रहने का अनुमान है.

भारत में राजकोषीय घाटा यानी Fiscal Deficit लगातार कम हो रहा है. 2016-17 में Fiscal Deficit GDP का 3.5 प्रतिशत था और अगले वित्त वर्ष में Fiscal Deficit 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है. यहां आपको बता दें कि सरकार के कुल खर्च और कुल कमाई के अंतर को Fiscal Deficit कहा जाता है. और इसका कम होना देश की आर्थिक स्थिति के लिए अच्छा होता है

GST की वजह से Tax देने वाले लोगों की संख्या में इज़ाफा हुआ है. Indirect Tax देने वालों की संख्या.. 50 % तक बढ़ गई है. 29 दिसंबर 2017 तक विदेशी मुद्रा भंडार 409 बिलियन डॉलर था. जबकि पहले ये 370 बिलियन डॉलर था. हालांकि चिंता की बात ये है कि खराब मौसम की वजह से कृषि की पैदावार पर असर पड़ा है. इसके अलावा सरकार ने पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई है. एक ख़ास बात ये भी है कि इस बार भारत सरकार ने ‘गुलाबी’ रंग में रंगा आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया है जो महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है.

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