किसानों पर मेहरबान होगी मोदी सरकार, जेटली के पिटारे से निकल सकती हैं ये 8 सौगातें

किसानों पर मेहरबान होगी मोदी सरकार, जेटली के पिटारे से निकल सकती हैं ये 8 सौगातें

इस बार का बजट पूरी तरह पेपरलेस होगा यानी जो लोग बजट की कॉपी लेना चाहते हैं वो सीधे वेबसाइट से ही डाउनलोड कर पाएंगे.

2019 से पहले मोदी सरकार का ये आख़िरी फ़ुल बजट है लिहाज़ा इसे चुनावी बजट कहना ग़लत नहीं होगा क्योंकि जनता का दिल जीतना बजट के केंद्र में रहेगा. इस बात के संकेत पहले ही मिल चुके हैं कि कृषि और रोज़गार पर बजट का फ़ोकस होगा और महिलाओं के सशक्तिकरण पर बल दिया जाएगा. इस बार का बजट पूरी तरह पेपरलेस होगा यानी जो लोग बजट की कॉपी लेना चाहते हैं वो सीधे वेबसाइट से ही डाउनलोड कर पाएंगे. हालांकि, वित्त मंत्री खुद प्रिंटेड बजट पढ़ेंगे. साथ ही वरिष्ठ सांसदों के लिए कुछ प्रतियां प्रिंट कराई गई हैं. बजट की भाषा या शब्दों को जो लोग नहीं समझ पाते उनके लिए इस बार वित्त मंत्रालय ने ख़ास सुविधा निकाली है. मंत्रालय ने बजट से जुड़े शब्दों का पोर्टल अपनी वेबसाइट पर डाला है जिसे पढ़कर आप बजट के कुछ मुश्किल आधिकारिक शब्दों का अर्थ भी समझ सकेंगे.

इसके अलावा बजट में जिन बिंदुओं पर ज़ोर रहेगा वो इस प्रकार हैं…

रोज़गार के अवसर
बजट में सरकार ना सिर्फ़ रोज़गार के आंकड़े सामने रखेगी बल्कि अलग-अलग मंत्रलयों की तरफ़ से इस दिशा में किए गए काम का लेखा-जोखा सामने रखते हुए लक्षय को पाने का रोडमैप भी पेश करेगी. युवाओं के लिए नए अवसर की घोषणा भी बजट में संभव है.

रेल
यात्रियों की सुविधा के लिए 3 हज़ार स्टेशन पर स्केलेटर और 1 हज़ार स्टेशन पर लिफ्ट लगाने की घोषणा हो सकती है. हाई स्पीड ट्रेन बढ़ाई जा सकती हैं. बजट में चार हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने की घोषणा हो सकती है.

वित्त
जीएसटी लागू होने के बाद मोदी सरकार का यह पहला बजट है. लोगों की जेब पर इसके बाद जो मार पड़ी उससे कैसे उबारा जाए ये पीएम मोदी और उनकी टीम के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं. फ़िलहाल अर्थव्यवस्था के आंकड़े पटरी पर हैं और वित्त मंत्री इस कोशिश में हैं कि कैसे मध्यम वर्ग को कुछ राहत दी जाए. इसलिए सरकार सैलरी पाने वालों को स्टैंडर्ड डिडक्शन में छूट दे सकती है. इसका मतलब है कि इनवेस्टमेंट पर टैक्स में छूट का दायरा बढ़ाया जा सकता है. अभी इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत केवल 1.5 लाख रुपए तक की ही टैक्स में छूट ली जा सकती है. वित्तमंत्री अरुण जेटली शेयरों में निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स भी लगा सकते हैं.

ग्रामीण विकास
किसानों को खेती के लिए उपकरणों की ज़रूरत होती है, ऐसे में किसान मशीनरी केंद्र की स्थापना की घोषणा जा सकती है. जहां से किसान सस्ते दर पर खेती के उपकरण किराए पर ले सकते हैं. साथ ही देश के 115 पिछड़े जिलों के लिए कुछ योजनाओं की घोषणा हो सकती है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल सकता है. हर परिवार को छत के तहत पिछले साल के बजट से बढ़ाकर राशि आवंटित की जा सकती है, ताकि 2022 तक के लक्ष्य को पहले ही पूरा किया जा सके. कुछ अन्य फ़सलों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य के दायरे में लाया जा सकता है. किसानों को आसान शर्तों पर ज़्यादा कर्ज़ देने का ऐलान संभव है. जल्दी ख़राब होने वाले फ़सलों के लिए कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए सरकार कुछ छूट का ऐलान भी कर सकती है.

सड़क परिवहन
देश की सड़कों के ज़रिए कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सरकार ने भारतमाला प्रोजेक्ट की घोषणा की थी, इस बार बजट में इस प्रोजेक्ट के लिये 15000 करोड़ रुपये पिछले बार से ज़्यादा दिए जाने की उम्मीद है.

स्वास्थ्य
आम बजट में सरकार हेल्‍थ और वेलनेस सेंटर खोलने के लिए 1,200 करोड़ रुपए का आवंटन कर सकती है. पिछले बजट में वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने 12,500 स्‍वास्‍थ्‍य उपकेंद्रों को वेलनेस सेंटर में बदलने की घोषणा की थी.

पर्यटन
बजट में भारत सरकार पर्यटन सेक्टर के लिए कम टैक्स दरों की सौगात दे सकती है. इसके लिए सरकार 210 अरब की प्रोत्साहन राशि रख सकती है. सरकार को लगता है कि ऐसा कदम उठाने से आर्थिक वृद्धि होगी और ढेरों रोजगार पैदा होंगे.

महिलाओं पर फ़ोकस
महिलाओं के लिए लोकलुभावनी योजनाओं की घोषणा हो सकती है. ख़ासकर आगामी चुनावों से पहले इस वोट बैंक पर मोदी सरकार की ख़ास नज़र है जिसकी बानगी राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी दिखाई दी थी. इस वर्ग के लिए वित्त मंत्री के पिटारे में सौग़ात होनी लाज़मी है.

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